सङ्ख्या सिद्धान्त
सङ्ख्या सिद्धान्त सामान्यतः सभ प्रकारके सङ्ख्याके गुणधर्मके अध्ययन करहे किन्तु विशेषतः ई प्राकृतिक सङ्ख्या १, २, ३....के गुणधर्मके अध्ययन करहे । पूर्णताके विचारसे ईसभ सङ्ख्यामे हमनी ऋण सङ्ख्या आउ शून्योके सम्मिलित कर ले ही । जखनितक निश्चित रूपसे नै कहल जाए, तखनितक सङ्ख्यासे कौनो प्राकृतिक सङ्ख्या, धन या ऋण पूर्ण सङ्ख्या या शून्य बुझेके चाही । सङ्ख्या सिद्धान्तके कार्ल फ्रेडरिक गाउस 'गणितके रानी' कहहल । सङ्ख्या सिद्धान्त, शुद्ध गणितके शाखा हे ।

'सङ्ख्या सिद्धान्त' लागि "अङ्कगणित" या "उच्च अङ्कगणित" शब्दोके प्रयोग कैल जा हे । ई शब्द अपेक्षाकृत पुराना हे आउ अखन बड्ड कम प्रयोग कैल जाहे ।
अनुप्रयोग
सम्पादित करथिन१९७४ मे डोनाल्ड नुथ कहलक हल कि कम्प्यूटरसे तीव्र गतिसे गणना करावेके प्रयासमे प्रारम्भिक सङ्ख्या सिद्धान्तके लगभग सभ प्रमेयके आवश्यकता पड़ जाहे । कम्प्यूटर विज्ञानके पाठ्यक्रममे विविक्त गणितके अन्तर्गत सङ्ख्या सिद्धान्तो पढ़ावल जाहे । ई सबके इलावा बीज-लेखन (क्रिप्टोग्राफी) आउ सतत आङ्किक विश्लेषणोमे सङ्ख्या सिद्धान्तके प्रयोग कैल जाहे ।
इहो देखी
सम्पादित करथिन- कुट्टक
- डायोफेण्टीय समीकरण
- गणितीय आगमन (mathematical induction)
- सङ्ख्या पद्धति (नम्बर सिस्टम)
- सङ्ख्याबोध
- बीजगणितीय सङ्ख्या सिद्धान्त (Algebraic number theory)
- वैश्लेषिक सङ्ख्या सिद्धान्त (Analytical number theory)