भारत अधिराज्य

१९४७ आउ १९५० के बीच भारतीय इतिहासके काल
(भारताधिराज्य से पुनर्निर्देशित)

भारत अधिराज्य वर्तमान भारत (अर्थात् भारत गणराज्य) के सङ्क्रमणकालीन अवस्था हल । ई ३ बरिस तक; १९४७ से १९५० मे संविधानके प्रवर्तन तक, अस्तित्वमे रहल हल । ई मूलरूपसे भारतमे ब्रिटिश-उपनिवेशिक शासित अवस्थासे स्वतन्त्र, स्वायत्त, लोकतान्त्रिक, भारतीय गणराज्यके बीचके अस्थाई शासन अथवा राज्य हल । एकरा आधिकारिक रूपसे भारत अधिराज्य एवं अङ्ग्रेजीमे डोमिनियन ऑफ इण्डिया(अङ्ग्रेजी: Dominion of India) कहल जा हल । १५ अगस्त १९४७ मे ब्रितानियाई संसद् मे भारतीय स्वतन्त्रता अधीनियम पारित होवेके बाद, अधिकारिक तौरपर, संयुक्त अधिराज्यके सरकार भारत पर अपन प्रभुता त्याग देलक आउ भारतमे स्वशासन अथवा स्वराज लागू कर देलक । एकरा साथहीँ ब्रिटिश भारत (ब्रिटिश-भारतीय उपनिवेष) के अन्त हो गेल आउ भारत कनाडा आउ आस्ट्रेलिये नियन एक स्वायत्त्योपनिवेष (डोमिनियन) बन गेल, (अर्थात् ब्रिटिश साम्राज्येमे स्वायत्त इकाई) । ब्रिटिश संसदके भारत-सम्बन्धित सब विधानाधिकारके (१९४५ मे गठित) भारतके संविधानसभाके अधिकारमे सौँप देल गेलै, भारत, ब्रिटिश-राष्ट्रमण्डल प्रदेशके सहपद सदस्यो बन गेल, साथे ब्रिटेनके राजा भारतके सम्राट के शाही खिताब त्याग देलक । ब्रिटिश स्वायत्तयोपनिवेष एवं रष्ट्रमण्डल प्रदेशके भाग होवेके नाते इङ्ग्लैण्डके राजा जॉर्ज षष्ठके भारतके राष्ट्राध्यक्ष बनावल गेल एवं अन्य राष्ट्रमण्डल देशे नियन भारतीय लहजेमे उनका भारतके राजाके उपाधिसे नवाजल गेल (ई पद केवल नाम-मात्र एवं शिष्टाचारला हल), भारतमे उनकर प्रतिनिधित्व भारतके महाराज्यपाल (गवरनर-जनरल) के द्वाराे होवहल । १९५० मे संविधानके लागू होवेके साथे भारत एक पूर्णतः स्वतन्त्र गणराज्य बन गेल आउ साथे भारतके राजाके पदके हमेशाला स्थगित कर देल गेलै, आउ भारतके संविधान द्वारा स्थापित लोकतान्त्रिक प्रक्रिया द्वारा चुनल गेल भारतके महामहिं राष्ट्रपतिके पदसे बदल देल गेल । ई बीच भारतमे दु महाराज्यपालके नियुक्त कैल गेल, महामहिम महाराज्यपाल लाॅर्ड माउण्टबेटन आउ महामहिम महाराज्यपाल चक्रवर्ती राजागोपालाचारी । चक्रवर्ती राजगोपालाचारीअधिराज्यके अन्तिम गवर्नर-जनरल हलन ।

भारत अधिराज्य

१९४७-१९५०
राष्ट्रगान: जन गण मन
शाही तराना
गाॅड सेव द किङ्ग
अङ्ग्रेजी: God save the King
भारतके प्रशासनिक प्रभाग, १९४९
भारतके प्रशासनिक प्रभाग, १९४९
राजधानीनवदिल्ली
सरकारसंवैधानिक राजतन्त्र
शासक 
 १९३६-१९५०
जॉर्ज षष्ठ
महाराज्यपाल 
 १९४७-१९४८
लाॅर्ड माउण्टबेटन
 १९४८-१९५०
चक्रवर्ती राजागोपालाचारी
प्रधानमन्त्री 
 १९४७-१९५०
जवाहरलाल नेहरू
विधानमण्डलसंविधानसभा
ऐतिहासिक युगमध्य २०मा शताब्दी, शीतयुद्ध
१५ अगस्त १९४७
२२ अक्टूबर १९४७
 संविधानके प्रवर्तन
२६ जनवरी १९५०
क्षेत्रफल
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मुद्राभारतीय रुपैया
पूर्ववर्ती
परवर्ती
ब्रिटिश राज
भारत

भारतमे ब्रिटिश-औपनिवेशिक-काल खन्नि स्वशासन आउ स्वराजके माङ्ग ढेर बेर उठैत रहलै, पर ब्रिटिश सरकार ईसभ माङ्गके हर बेर खारिज कर देलक आउ सब आन्दोलनके बल द्वारा दबावेके प्रयत्न करैत रहलै । किन्तु १९२० के दशकमे स्वराजला शुरू भेल ई आन्दोलनके पूर्ण-स्वराजमे परिवर्तित होवेमे देर नै लगल । तमाम उतार-चढ़ावके बाद लगभग ३० बरिसके बाद १९४७ अङ्ग्रेज सरकार भारतके स्वराज प्रदान करेके निर्णय कर लेलक । महात्मा गान्धी द्वारा शुरू कैल गेल नमक सत्याग्रहके सफलता आउ ओकरा भेटल विशाल जनसमर्थनके बाद अङ्ग्रेज सरकार बुझ गेल हल कि भारतके जादे समय तक अखनि विदेशी-नियन्त्रणमे रखल असम्भव हल, आउ स्वतन्त्रता खाली समयके बात रह गेल हल । काङ्ग्रेस द्वारा कैल गेल पूर्ण-स्वराज घोषणा, ब्रिटिश-भारतीय नौसेनाके विद्रोह आउ द्वितीय विश्वयुद्धके बाद ब्रिटेनमे आएल आर्थिक-मन्दी अन्तिम कीलके काम कैलक । १९४७ मे ब्रिटेनके संसद् मे भारतीय स्वतन्त्रता अधीनियमके पारित होवेके बाद, ब्रिटिश सरकार भारत पर अधिपत्यता त्याग देलक आउ एकरे साथे भारतमे स्वराजके स्थापना भेल । एकरा बाद ब्रिटिश बिधि प्रक्रियाके तहत भारतके ब्रिटिश-उपनिवेशसे ब्रिटिश-स्वायत्तयोपनिवेश (डोमीनियन) के दर्जा दे देल गेल । जेकरा बाद कानूनी तौरपर भारत एक स्वायत्तय एवं स्वतन्त्र राष्ट्र बन गेल एवं प्रक्रिया-स्वरूप भारत, ब्रिटिश-राष्ट्रमण्डल प्रदेशके भाग बन गेल आउ इन्य राष्ट्रमण्डल प्रदेश नियन ब्रिटेनके राजा, जॉर्ज षष्ठके भारतके राष्ट्राध्यक्ष बना देल गेल, जेकरा तहत भारतीय बिधि तौरपर उनका भारतके राजाके पारम्परिक एवं नाममात्रके पदसे सम्मानित कैल गेल । भारतमे उनका प्रतिनिधित्व भारतके महाराज्यपाल (गवर्नर-जनरल) द्वारा होवहल, जिनका "भारतके राजा" के सब कार्याधिकार हासिल हल । १९५० मे संविधानके संविधानसभाके स्वीकृति भेल गेल आउ २६ जनवरी १९५० के संविधानके परवर्तनके साथे भारत एक स्वतन्त्र गणराज्य बन गेल आउ आधिराजकीय व्यवस्थाके संविधान द्वारा गणराजकीय व्यवस्थासे बदल देल गेल । भारतके राजा आउ महाराज्यपालके पदके समाप्त कर देल गेल एवं लोकतान्त्रिक रूपसे चुनल भारतके महामहिं राष्ट्रपतिके राष्ट्राध्यक्ष बना देल गेल ।

राजतन्त्रिक व्यवस्था एवं कार्यप्रणाली

सम्पादित करथिन
भारतके गवर्नर-जनरलके व्यक्तिगत ध्वज

अधिराजकीय राजतन्त्रिक व्यवस्थामे सब स्वायत्त्योपनिवेश (या अधिराज्य) के केवल एके नरेश एवं एके राजघराना होवहे, अर्थात् सब अधिराज्य पर एके व्यक्ति (सम्राट, नरेश राजा या शासक) के राज होवहे । ई नरेश, हरेक अधिराज्य पर सामान्य अधिकार रखहे एवं हर अधिराज्यमे संवैधानिक आउ कानूनन रूपसे ओकरा राष्ट्राध्यक्षके दर्जा प्राप्त होवहे । ई होवेके बावजूदो सब अधिराज्य स्वतन्त्र एवं तथ्यस्वरूप स्वतन्त्र रहहे काहेकि हर देशमे अपन खुदके स्वतन्त्र सरकार होवहे आउ नरेशके पद केवल परम्परागत एवं कथास्वरूपके होवहे । शासकके सम्पूर्ण कार्यभार एवं कार्याधिकार ऊ देशके महाराज्यपालके नियन्त्रणमे रहहे जेकरा तथ्यस्वरूप सरकार द्वारा नियुक्त कैल जाहे । ई प्रकारके व्यवस्था सार्थक रूपसे ब्रिटिश साम्राज्य आउ ब्रिटिश-राष्ट्रमण्डल प्रदेश (ब्रिटेन, कनाडा, आस्ट्रेलिया, आदि) एवं पूर्व ब्रिटिश अधिराज्यके शासन प्रणालिमे देखल जा सकहे । भारतमे इस क्षणिक स्वयत्योपनिवेशिय कालमे एही प्रकारके शासन प्रणाली रहलै हल । ई बीच भारतमे विधानपालिकीके पूरा कार्यभार संविधानसभा पर हल आउ कार्यपालिकाके मुखिया भारतके प्रधानमन्त्री हल । ई बीच भारत पर केवल एक; राजा जॉर्ज षष्ठके राज रहल, एवं दु महारज्यपाल आउ एक प्रधानमन्त्रीके नियुक्ती भेल ।

भारतके नरेशके सूची

सम्पादित करथिन
विञ्जर राजघराना
चित्र नाम जन्मतिथि मृत्युतिथि पदग्रहणके तिथि पदत्यागके तिथि विवरण
महाराज जाॅर्ज (षष्ठ) १४ दिसम्बर १८९५ ६ फरवरी १९५२ १५ अगस्त १९४७ २६ जनवरी १९५० भारतके राजा पदके एकमात्र प्रभारी

भारतके महाराज्यपालके सूची

सम्पादित करथिन
नाम चित्र पदग्रहणके तिथि पदत्यागके तिथि
महामहिम महाराज्यपाल, विस्काण्ट, बर्माके लाॅर्ड माउण्टबेटन १५ अगस्त १९४७ २१ जून १९४८
महामहिं महाराज्यपाल श्री चक्रवर्ती राजगोपालाचारी २१ जून १९४८ २६ जनवरी १९५०

भारत अधिराज्यके प्रधानमन्त्रीके सूची

सम्पादित करथिन
नाम चित्र जन्मतिथि मृत्युतिथि कार्यालय - प्रवेश कार्यालय - त्याग राजनैतिक दल
जवाहरलाल नेहरू १४ नवम्बर १८८९ २७ मई १९६४ १५ अगस्त १९४७ २७ मई १९६४ भारतीय राष्ट्रिय काङ्ग्रेस