ताड़का रामायणके एक पात्र हलै । ई सुकेतु यक्षके पुत्री हलै जेकर बियाह सुड नामक राक्षसके साथे होलै हल । ई बक्सरके समीप (ताड़ बम्हवार वर्तमान) तपोवनमे अपन पति आउ दु पुत्र सुबाहु आउ मारीचके साथे रहऽ हलै । ओकर शरीरमे हजार हाथीके बल हलै । ओकर प्रकोपसे वनके नाम ताड़का वन पड़ गेलै हल । ओही तपोवनमे विश्वामित्र सहित अनेक ऋषि-मुनियो रहऽ हलन । उनकर जप, तप आउ यज्ञमे ई राक्षस गण हमेशा बाधा खड़ी करऽ हलै । विश्वामित्र राजा दशरथसे अनुरोध करके राम आउ लक्ष्मणके अपना साथ तपोवन लौलन । राम ताड़काके आउ विश्वामित्रके यज्ञके पूर्णाहूति के दिन सुबाहुओके वध कर देलन । मारीच उनकर बाणसे आहत होके दूर दक्षिणमे समुद्रतट पर जाके गिर गेलै ।

ताड़का आउ भगवान राम, लक्ष्मण आउ विश्वामित्र

सुकेतु नामके एक अत्यन्त बलवान यक्ष हलै । ओकर कोनो सन्तान न हलै । अतः सन्तान प्राप्तिके उद्देश्यसे ऊ ब्रह्माजीके कठोर तपस्या कैलकै । ओकर तपस्यासे प्रसन्न होके ब्रह्माजी ओकरा सन्तान होवेके वरदान दे देलन आउ ऊ वरके परिणामस्वरूप ताड़काके जनम होलै । सुकेतु ब्रह्माजीसे ताड़काके अत्यन्त बली होवेके वरो ले लेलकै आउ ब्रह्माजी ओकर शरीरमे हजार हाथीके बल दे देलन ।

बियाह योग्य आयु होवे पर सुकेतु ताड़काके बियाह सुन्द नामके राक्षससे कर देलकै आउ ओकरासे सुबाहु आउ मारीचके जनम होलै । मारीचो अपन माताके समान बलवान आउ पराक्रमी होलै ।

पुत्र आउ पतिके दुर्गति

सम्पादित करथिन

ताड़काके पुत्र मारीच सुन्द राक्षससे उत्तपन्न होहुँके स्वयं राक्षस न हलै । किन्तु बचपनमे ऊ बड़ी उपद्रवी हलै । ऋषि मुनिके अकारण कष्ट देल करऽ हलै । ओकर उपद्रवसे दुखी होके एक दिन अगस्त्य मुनि ओकरा राक्षस हो जाएके शाप दे देलन । अपन पुत्रके राक्षस गति प्राप्त हो जाएसे सुन्द अत्यन्त क्रोधित हो गेलै आउ अगस्त्य ऋषिके मारेला दौड़लै । एकरा पर अगस्त्य ऋषि शाप देके सुन्दके तत्काल भस्म कर देलन ।

बदला आउ मृत्यु

सम्पादित करथिन

अपन पतिके मृत्यु आउ पुत्रके दुर्गतिके बदला लेवेला ताड़का अगस्त्य ऋषि पर झपटलै । परिणामस्वरूप ऋषि अगस्त्य शाप देके ताड़काके सुन्दरताके नष्ट कर देलन आउ ऊ अत्यन्त कुरूप हो गेलै । अपन कुरूपताके देखके आउ अपन पतिके मृत्युके बदला लेवेला ताड़का अगस्त्य मुनिके आश्रमके नष्ट करेके सङ्कल्प कैलकै । एहीसे ऋषि विश्‍वामित्र ताड़काके वध रामके हाथ करवा देलन ।