चन्द्रघण्टा
दुर्गाके तृतीय स्वरूप
माँ दुर्गाजीके तीसरष शक्तिके नाम चन्द्रघण्टा है । नवरात्रि उपासनामे तीसरा दिनके पूजाके अत्यधिक महत्व है आउ ई दिन इनके विग्रहके पूजन-आराधन कैल जा है । ई दिन साधकके मन 'मणिपूर' चक्रमे प्रविष्ट होवऽ है । लोकवेदके अनुसार माँ चन्द्रघण्टाके कृपासे अलौकिक वस्तुके दर्शन होवऽ है, दिव्य सुगन्धीके अनुभव होवऽ है आउ विविध प्रकारके दिव्य ध्वनी सुनाई दे है । ई क्षण साधकला अत्यन्त सावधान रहेके होवऽ है ।
| चन्द्रघण्टा | |
|---|---|
| सिद्धि | |
चन्द्रघण्टा - नवदुर्गामे तृतीय | |
| देवनागरी | चन्द्रघण्टा |
| सम्बन्ध | हिन्दु देवी |
| अस्त्र | कमल |
| जीवनसङ्गी | शिव |
| सवारी | सिंह |
स्वरूप
सम्पादित करथिनमाँके ई स्वरूप परम शान्तिदायक आउ कल्याणकारी है । इनकर मस्तकमे घण्टाके आकारके अर्धचन्द्र है, एकरे चलते इनका चन्द्रघण्टा देवी कहल जा है । इनकर शरीरके रङ्ग स्वर्ण नियन चमकीला है । इनकर दस हाथ है । इनकर दसो हाथमे खड्ग आदि शस्त्र आउ बाण आदि अस्त्र विभूषित है । इनकर वाहन सिंह है । इनकर मुद्रा युद्धला उद्यत रहे के होवऽ है ।[१]
सन्दर्भ
सम्पादित करथिन- ↑ "Navratri 2021: मां भगवती का तीसरा स्वरूप हैं मां चंद्रघंटा, इस तरह करें इनकी पूजा". Jansatta (in हिन्दी). Retrieved 2021-10-10.
{{cite web}}: CS1 maint: unrecognized language (link)