ऋषभदेव
ऋषभदेव जैनधर्मके ई हुण्डावसर्पिणी कालके प्रथम जैन तीर्थङ्कर हथिन । जैन मान्यताके अनुसार ऊ अपन सब कर्मके क्षय करके अपन आत्माके मुक्त कर लेलन आउ सिद्ध पदवी प्राप्त कैलन ।[४]
| ऋषभदेव | |
|---|---|
| प्रथम तीर्थङ्कर | |
पालितानामे ऋषभनाथके मूर्ति | |
| अन्यनाम | आदिनाथ, आदेश्वर, आदर्शपुरुष, इक्ष्वाकु |
| मन्त्र | ॐ श्री आदिनाथाय नमः |
| प्रतीक | साँड़ |
| वर्ण | सुवर्ण |
| जीवनसङ्गी | सुमङ्गला/यशस्वती सुनन्दा/नन्दा [१][२] |
| माता-पिता | |
| सन्तान | • १०० पुत्र (चक्रवर्ती भरत, राजकुमार नामी आउ कामदेव बाहुबली सहित) जैनधर्मके अनुसार • २ पुत्री: ब्राह्मी आउ सुन्दरी (महासती) सन्दर्भ:[३] |
| शास्त्र | त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित आवश्यक निर्युक्ति कल्प सूत्र भक्तामर स्तोत्र |
| त्योहार | अक्षय तृतीया |
एकरो देखथिन
सम्पादित करथिनसन्दर्भ
सम्पादित करथिन- ↑ Jaini 2000, पृ॰ 327.
- ↑ Champat Rai Jain 1929, पृ॰ 64-66.
- ↑ Dalal 2010b, पृ॰ 311.
- ↑ "" ऋषभदेव जी "", Jainism Knowledge
बाहरी कड़ी
सम्पादित करथिन- पुराणमे ऋषभ पर टिप्पणी (संस्कृत)
- d:Q9429