ऋषभदेव जैनधर्मके ई हुण्‍डावसर्पिणी कालके प्रथम जैन तीर्थङ्कर हथिन । जैन मान्यताके अनुसार ऊ अपन सब कर्मके क्षय करके अपन आत्माके मुक्त कर लेलन आउ सिद्ध पदवी प्राप्त कैलन ।[]

ऋषभदेव
प्रथम तीर्थङ्कर
ऋषभनाथ
पालितानामे ऋषभनाथके मूर्ति
अन्यनामआदिनाथ, आदेश्वर, आदर्शपुरुष, इक्ष्वाकु
मन्त्रॐ श्री आदिनाथाय नमः
प्रतीकसाँड़
वर्णसुवर्ण
जीवनसङ्गीसुमङ्गला/यशस्वती
सुनन्दा/नन्दा [][]
माता-पिता
सन्तान• १०० पुत्र (चक्रवर्ती भरत, राजकुमार नामी आउ कामदेव बाहुबली सहित) जैनधर्मके अनुसार
• २ पुत्री: ब्राह्मी आउ सुन्दरी (महासती)
सन्दर्भ:[]
शास्त्रत्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित
आवश्यक निर्युक्ति
कल्प सूत्र
भक्तामर स्तोत्र
त्योहारअक्षय तृतीया

एकरो देखथिन

सम्पादित करथिन
  1. Jaini 2000, पृ॰ 327.
  2. Champat Rai Jain 1929, पृ॰ 64-66.
  3. Dalal 2010b, पृ॰ 311.
  4. "" ऋषभदेव जी "", Jainism Knowledge

बाहरी कड़ी

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